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ममता की मोदी को तीनों क्रिमिनल कानूनों को लेकर चिट्ठी:

लिखा- जल्दी में पास किए गए,1 जुलाई से इनका लागू होना टालें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। ममता ने मोदी से अपील की है कि तीनों क्रिमिनल कानूनों का लागू होना फिलहाल टाल दें। इन कानूनों को जल्दी में पास किया गया है। बंगाल की सीएम ने संसद से इन कानूनों की नई समीक्षा कराने की मांग की है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ममता ने इन तीनों कानूनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सूत्रों के मुताबिक, ममता ने गुरुवार 20 जून को कांग्रेस नेता पी चिदंबरम से मुलाकात की थी। चिदंबरम इन तीनों कानूनों की जांच को लेकर बनाई गई संसद की स्थायी समिति के सदस्य थे।

तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हो जाएंगे। सरकार ने 24 फरवरी 2024 को इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की थी। यानी इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हो जाएगा।

ममता बनर्जी ने लेटर में लिखा- लोकसभा ने आपराधिक कानूनों के तीनों बिल को तब पास किया, जब 146 सांसदों को सस्पेंड किया गया था। कुछ महीनों में चुनाव होने थे। सरकार ने संसद में बिना चर्चा कराए एकतरफा तरीके से बिल पास करा लिए। जिस दिन बिल पास हुए, उस दिन लोकसभा से करीब 100 सदस्यों और दोनों सदनों से कुल मिलाकर 146 सांसदों को निलंबित किया गया था।

‘मेरी आपसे (पीएम मोदी) से अपील है कि कम से कम इन बिलों को अभी लागू होने से रोकें। वजह दो हैं- नैतिक और व्यावहारिक। अब जब चुनाव हो चुके हैं और नए संसद सदस्य चुनकर आ चुके हैं, तब कानूनों में हुए बदलावों को संसद के सामने रखा जाना चाहिए।’

ममता ने ये भी कहा- मेरा भरोसा है कि अगर कानून लागू नहीं होते और उनका रीव्यू किया जाता है तो इससे लोगों का न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा और देश में कानून का शासन लागू होगा।

3 विधेयकों से क्या बदलाव हुए
कई धाराएं और प्रावधान बदल गए हैं। IPC में 511 धाराएं थीं, अब 356 बची हैं। 175 धाराएं बदल गई हैं। 8 नई जोड़ी गईं, 22 धाराएं खत्म हो गई हैं। इसी तरह CrPC में 533 धाराएं बची हैं। 160 धाराएं बदली गईं हैं, 9 नई जुड़ी हैं, 9 खत्म हुईं। पूछताछ से ट्रायल तक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रावधान हो गया है, जो पहले नहीं था।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं। इसी तरह जिला अदालतों में जजों के 25,042 पदों में से 5,850 पद खाली हैं।

भारतीय न्याय संहिता में क्या बड़े बदलाव हुए..

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।
  • ऑर्गनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान।
  • डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
  • IPC में मौजूद 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है।
  • 33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ा दी गई है।
  • 83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ा दी गई है।
  • छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।

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