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रूंगटा के बाद इस कम्पनी में HPC का पालन नहीं,ठगे जा रहे कर्मचारी

कोरबा। छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के गृह जिले में एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में ठेका मजदूरों के साथ हो रहे शोषण पर केवल आश्वासन देकर अपना काम निकाला जा रहा है। स्थानीय श्रमिक/ भूविस्थापित नेता भी ऐसे कंपनियों को लेकर कोई विरोध दर्ज नहीं करा पा रहे हैं जिसके कारण ठेका कंपनी अपनी मनमानी करती आ रही है और स्थानीय बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
पिछले दिनों ठेका कंपनी रुंगटा को लेकर विवाद सामने आया था। शिकायत हुई थी कि यहां कार्यरत चालकों को एचपीसी दर पर भुगतान नहीं हो रहा है। कुशल, अर्ध कुशल, अकुशल कर्मचारियों के हिसाब से मिलने वाले भुगतान से वंचित रखा जा रहा है और जो दर एचपीसी में निर्धारित है, उसके अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही है। इस मामले का पटाक्षेप दी जा रहे मजदूरी की रकम को बढ़ाकर कराया गया लेकिन आज भी इन कर्मचारियों को एचपीसी दर पर भुगतान नहीं हो रहा है। इन कर्मचारियों को ठेका कंपनी यह कहकर शांत कर देती है कि वह कुशल कर्मचारी नहीं हैं, उनमें कोई ना कोई कमी है और वह मापदंडों का पालन नहीं करते व मेडिकली फिट नहीं हैं फिर भी काम पर रखा गया है। सीधी सी बात है कि कंपनियां, बेरोजगारी का फायदा उठाकर कम वेतन में कर्मचारी रखकर लाभ कमाने की मंशा से कहीं ना कहीं अन्ट्रेंड हाथों में वाहनों की स्टेयरिंग थमा रहे हैं। बेरोजगारी की मार झेल रहे लोग कुछ रोजगार और कुछ पैसा मिल जाने के कारण खामोश हैं और अपना काम कर रहे हैं लेकिन इसकी आड़ में ठेका कंपनी 50 से 75% मजदूरी देकर शेष रकम को डकार रही है। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में सारा कुछ ओके बताया जाता है क्योंकि इसमें कोई गफलत हुई तो सीधे तौर पर कार्रवाई होगी। कागज में तो एचपीसी दर का पालन हो रहा है लेकिन हकीकत में ठेका मजदूर अधूरा वेतन ही हासिल कर पा रहे हैं।

0 जय अम्बे रोड लाइंस के खिलाफ रोष

रुंगटा कंपनी के बाद अब कोल डिस्पेच का काम कर रही जय अम्बे रोड लाइन पर मजदूरों ने शोषण का आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा एचपीसी दर पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा महीने भर काम करने के बाद भी उन्हें पेमेंट समय पर नहीं दिया जा रहा है। ठेका कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें सेफ्टी के लिए ना जूते दिए गए हैं और ना ही टोपी। यहां तक की उनका बी-फॉर्म भी नहीं भरा गया है। बावजूद इसके उनसे काम लेकर उनके साथ शोषण किया जा रहा है। जय अम्बे कंपनी के कर्मचारी बुधवार को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किए। कुछ देर पश्चात एरिया महाप्रबंधक राजीव सिंह ने ठेका मजदूरों की बात सुनी और मौके पर जय अम्बे कंपनी के अधिकारियों को बुलाकर समस्याओं को दूर करने की बात कही।

0 अक्सर मुंह मोड़ लेता है प्रबंधन, नेतृत्व और नेता दोनों गायब…..
SECL की खदानों में काम कर रही निजी ठेका कंपनियां मूल रूप से SECL के अधीन ही होकर काम करती हैं और नियम कायदों का पालन कराने के लिए मूल नियोक्ता की जवाबदेही तय रहती है, लेकिन देखा जा रहा है कि अनेक मामलों में प्रबंधन और उसके अधिकारी ठेका कर्मचारियों के मामले में मुंह मोड़ लेते हैं। ज्ञात हुआ है कि अभी नीलकंठ कंपनी का काम बंद है, ऐसे में कंपनी के द्वारा अपने अधीन नियोजित किए गए कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। लगभग एक माह से मजदूर खाली बैठे हैं और नीलकंठ कंपनी के लोग कह रहे हैं कि उन्हें आधा वेतन दिया जाएगा। जानकार बताते हैं कि यदि ठेका कंपनी के पास काम नहीं है तो यह उनकी अपनी समस्या है और जब उन्होंने कर्मचारियों को नियोजित किया है तो उन्हें पूरा वेतन देना चाहिए। इस तरह के मामलों में प्रबंधन कोई संज्ञान नहीं लेता। प्रबंधन का रवैया और ठेका कंपनी के लोगों के द्वारा दबाव में रखकर काम कराने की प्रवृत्ति के कारण आपसी असंतोष ज्यादातर उभरकर सामने आ रहे हैं। इन सबके बीच ये मजबूर मजदूर जब अपने श्रमिक नेताओं की ओर कातर नजरों से देखते हैं, तो वहां से भी कोई राहत मिलती नजर नहीं आती क्योंकि जिन भूविस्थापितों/मजदूरों की दुहाई यह श्रमिक नेता लोग पहले दिया करते थे, अब वह खुद कंपनियों में ठेकेदार से लेकर विभिन्न पदों पर आसीन होकर बैठे हैं और लाभ कमा रहे हैं। अब वह अपना लाभ देखें या ठेका कर्मचारी/ मजदूर के चक्कर में प्रबंधन से बिगाड़ करें! इन हालातों में मजदूरों को खुद ही अपनी समस्याओं के लिए लड़ना और जूझना पड़ रहा है, नेतृत्व और नेता दोनों गायब हैं।

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