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    नही किया गया नियमों का पालन:बिना रोस्टर बनाये 16 साल तक दिया गया मिनिस्ट्रियल स्टाफ को प्रमोशन

    Akash TimesBy Akash Times31/08/2024No Comments5 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ में एससी,एसटी, ओबीसी वर्ग के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम 1994 और लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 का राज्य गठन के बाद 2019 तक उल्लंघन किया गया है। नियमों की अनदेखी खासतौर पर पीएचक्यू, एसपी कार्यालय,रेंज आईजी कार्यालय और बटालियन में पदस्थ मिनिस्ट्रीयल कार्मचारियों के पदोन्नति में की गई है।

    नियमों का उल्लंघन करके वर्ष 2003 से 2019 तक कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया। रोस्टर बिंदू और बैकलॉग रजिस्टर का संधारण किए बगैर कर्मचारियों को 16 वर्षों तक पदोन्नति दी गई। जिसका खामियाजा दफ्तरों में पदस्थ करीब 1 हजार पुलिसकर्मियों को उठाना पड़ा। जबकि अधिनियमों को पालन किए बिना पदोन्नति की कार्रवाई को शून्यकरण करने का नियम है।

     ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि रोस्टर बिंदू और बैकलॉग रजिस्टर की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने भी यह पाया कि रोस्टर की सही तरीके से संधारण नहीं किया गया। वहीं बैकलॉक रजिस्टर तो बनाया ही नहीं गया। इन सभी खामियों को दूर करने के लिए जो कमेटी बनाई गई थी वो सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है। मार्च 2021 में डीजीपी ने बनाई पहली समिति 24 मार्च 2021 को डीजीपी ने संधारित रोस्टर रजिस्टरों की जांच के लिए टीम बनाई। इस टीम के अध्यक्ष आरएन दास को बनाया गया। दास के साथ टीम में एलएलकोटवानी और भावना गुप्ता को शामिल किया गया।

    टीम ने रोस्टर रजिस्टर की जांच और परीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में बताया कि पृथक से बैकलॉग रोस्टर इसके साथ समस्त पदोन्नतियों का परीक्षण करके आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीजीपी को प्रस्तुत करे। कागजों में सिमट कर रह गई दूसरी समिति पहली समिति की रिपोर्ट के बाद डीजीपी ने 3 मार्च 2024 को दूसरा आदेश जारी किया। इस आदेश में 24 मार्च को बनाई गई टीम की रिपोर्ट का पालन कराने के लिए एक नई टीम बनाई गई। इस टीम में ओपी पाल,आर.एन.दास और उषा नेताम को शामिल किया गया। इसके बाद से जांच रिपोर्ट धूल खा रही है।

    नियम का पालन कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान लोक सेवा (अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 के मुताबिक कोई नियुक्ति अधिकारी धारा 6 की उपधारा 1 के अधीन उत्तरदायित्व सौंपा गया है,ऐसी रीति में जानबूझकर कार्य करता है जो इस अधिनियम के प्रयोजनो का उल्लंघन करने या उन्हें विफल करने के लिए आशायित है,या धारा 14-क के निबंधनों के अधीन मिथ्या प्रमाण पत्र का पृष्ठांकन करता है,नियुक्ति अधिकारी का ऐसा कृत्य उस पर लागू आचरण या सेवा नियमों के अधीन अवचार समझा जाएगा।

    ऐसे अवचार के लिए उक्त नियमों के अधीन अनुशासनिक कार्यवाहियों के साथ सक्षम अधिकारारिता वाले किसी न्यायलय द्वावा अभियोजित किए जाने का दायी होगा। दोष सिद्ध पर कारावास से ,जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का होगा। अधिनियम में स्पष्ट है कि इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पश्चात इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में की गई समस्त नियुक्तियां शून्यकरणीय होगी।

     

    { 4 मार्च 2013 को पुलिस प्रशासन विभाग ने पत्र लिखकर छग लोक सेवा (अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण ) संशोधन नियम 2012 के तहत नियमों का पालन करने का निर्देश दिया {21 अप्रैल 2017 को प्रशासन विभाग ने लिखकर दिया कि वर्ष 2012 में पदोन्नति आरक्षण के जारी नवीन रोस्टर बिंदू संधारण का कार्य प्रक्रियाधीन है। {15 मार्च 2022 को सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में पुलिस विभाग ने लिखकर दिया कि बैकलॉग रजिस्टर संधारित नहीं किया गया है। {15 जून 2022 को पुलिस विभाग ने लिखकर दिया कि नियमों के परिप्रेक्ष्य में किसी भी पोदन्नति आदेशों का शून्यीकरण नहीं किया गया है। दफ्तरों में ऐसा रहता है मिनिस्ट्रीयल स्टाफ का सेटअप { पुलिस मुख्यालय – 200 कर्मचारी { बड़े जिले – 25 से 30 कर्मचारी { छोटे जिले – 15 से 20 कर्मचारी { रेंज आफिस – 10 से 15 कर्मचारी { बटालियन – 10 से 15 कर्मचारी 2019 के पहले क्यों जरुरी था रोस्टर और बैकलॉग। { रोस्टर के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित वर्गों के कर्मचारियों की पदोन्नति प्रकिया पूरी किया जाना था । { बैकलॉग रजिस्टर से रिक्त पदों की सही जानकारी मिलेगी,जिससे पदोन्नति प्रकिया सही तरीके से पूरी होगी। कार्यपालिक उप निरीक्षक एवं निरीक्षक का रोस्टर भी संदेह के घेरे में – पुलिस विभाग में पदस्थ कार्यपालिक उप निरीक्षक एवं निरीक्षक के मामलों में पदोन्नति के लिए राज्य शासन के निर्धारित नियमित रोस्टर एवं बैकलॉक रोस्टर पालन नहीं किये जाने की पूरी संभावना है। कार्यपालिक उप निरीक्षक एवं निरीक्षक के रोस्टर की जांच होना आवश्यक है, क्योंकि छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2003 के नियम 10 अनुसार रोस्टर पंजी का सत्यापन किसी भी अधिकारी ने नहीं किया गया है।

    ^मुझे इस विषय की जानकारी नही है। इस पूरी प्रक्रिया को मैं चेक करवाता हूँ। अगर रोस्टर बिंदु और बैकलॉग रजिस्टर का बिना पालन किए मिनिस्ट्रियल स्टाफ को प्रमोशन दिया गया है तो ये गलत है। अगर कोई कमेटी बनाई गई थी जिसे इसका पालन कराना था,जो नही हुआ वो भी गलत है।
    -विजय शर्मा, गृह मंत्री छ.ग. शासन

     
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