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    हाईकोर्ट बोला- बदलापुर की घटना को एनकाउंटर मानना मुश्किल:4 अफसर एक आरोपी को नहीं संभाल पाए; बचाव में पैर पर गोली मारते हैं, सिर में नहीं

    Akash TimesBy Akash Times25/09/2024No Comments7 Mins Read
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    बदलापुर में नर्सरी की दो बच्चियों के साथ यौन शोषण के आरोपी अक्षय शिंदे के एनकाउंटर पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को सवाल उठाए।

    कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा- हम कैसे मान लें कि 4 अफसर एक आरोपी को संभाल नहीं पाए। हथकड़ी भी लगी थी, अगर सेल्फ डिफेंस जैसी स्थिति थी तो आरोपी के पैर पर गोली मारते, सिर में नहीं।

    बेंच ने कहा- अगर गोली चलाने वाला अफसर असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर है, तब वह यह नहीं कह सकता कि उसे रिएक्शन कैसे करना है, इसकी जानकारी नहीं थी। उसे पता होना चाहिए कि फायर कहां करना है।

    कोर्ट ने कहा- जैसे ही आरोपी ने ट्रिगर दबाया 4 लोग आसानी से उस पर काबू पा सकते थे। वो कोई बहुत मजबूत आदमी नहीं था। यह स्वीकार करना बहुत मुश्किल है। इसे एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता है।

    अक्षय के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाकर एनकाउंटर की SIT से जांच की मांग की है। इस पर जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की बेंच ने सुनवाई की। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।

    जो अफसर अक्षय शिंदे को ले जा रहा था वो ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच से था?

     जिस जगह घटना हुई, वो जगह खाली थी या फिर आसपास कॉलोनी और मकान थे?

    दाईं ओर पहाड़ियां थीं और बाईं तरफ एक छोटा सा कस्बा था। जैसे ही यह घटना हुई उसके तुरंत बाद अक्षय और घायल पुलिसवाले को अस्पताल ले जाया गया।

     किस अस्पताल ले गए, वो कितनी दूर था?

     कलवा के करीब शिवाजी हॉस्पिटल। करीब 25 मिनट का रास्ता था। सबसे करीब अस्पताल यही था।

     जब इतने गंभीर अपराध के आरोपी को ले जा रहे थे तो लापरवाही कैसे हो सकती है। SOP क्या है, क्या उसे हथकड़ी लगी थी?

    लगी थी, उसने पानी मांगा था।

     क्या आपने पिस्टल के फिंगर प्रिंट लिए थे?

     FSL ने फिंगर प्रिंट लिए थे।

     आप कह रहे हैं कि आरोपी ने 3 गोलियां चलाई थीं, पुलिस जवान को एक गोली लगी, बाकी 2 कहां गईं? आमतौर पर सेल्फ डिफेंस में हम पैर या हाथ पर गोली मारते हैं?

    अफसर ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, उसने खाली रिएक्ट किया।

    हम कैसे मान लें कि गाड़ी में 4 अफसर थे और एक आरोपी को संभाल नहीं पाए?

    यह ऑन द स्पॉट रिएक्शन था।

    क्या इसे टाला नहीं जा सकता था? पुलिस ट्रेन होती है। आम आदमी भी यह जानता है कि सेल्फ डिफेंस में पैर पर गोली मारी जाती है? अफसर की डेजिग्नेशन क्या है, जिसने आरोपी को गोली मारी?

    वो एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) है।

    तब अफसर नहीं कह सकता कि उसे रिएक्शन कैसे करना है इसकी जानकारी नहीं थी, उसे पता होना चाहिए कि फायर कहां करना है। जैसे ही आरोपी ने ट्रिगर दबाया 4 लोग आसानी से उस पर काबू पा सकते थे। वो कोई बहुत मजबूत आदमी नहीं था। यह स्वीकार करना बहुत मुश्किल है। इसे एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता है।

    नतीजे तक पहुंचने के लिए कुछ स्वतंत्र एजेंसियों से जांच करानी चाहिए। स्टेट सीआईडी और एसीपी इसकी जांच कर रहे हैं।

    क्या आपने पुलिस अफसर के फिंगर प्रिंट लिए? आप सभी अफसरों के फिंगर प्रिंट लीजिए, हम हर एंगल से इस केस को देख रहे हैं। फॉरेंसिक टीम का इंतजार करने की बजाय आपको अपने तरीके से फिंगर प्रिंट लेने चाहिए थे। CCTV फुटेज कहां हैं?

    हमने रास्ते में ही सरकारी और निजी बिल्डिंगों के फुटेज सुरक्षित रखने को कह दिया था।

    हमें एक और चीज चाहिए। फॉरेंसिक टीम से कहिए कि पता लगाए कि आरोपी को गोली दूर से मारी गई थी या पॉइंट ब्लैंक रेंज से। उसे गोली कहां लगी? भले ही इसमें पुलिसवाले इन्वॉल्व हों, लेकिन हम मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। हम शक नहीं कर रहे, लेकिन हमें सच्चाई चाहिए। क्या कोई FIR आरोपी के पिता ने दाखिल की है?

    नहीं।हथियारों को सही तरह से सीज कर दिया है ना? जी ये FSL को भेज दिए गए हैं।

     घटना से एक दिन पहले POCSO के तहत केस दर्ज किया गया था। हम शव को दफनाना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जगह नहीं मिल रही है।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि गोली पॉइंट ब्लैंक रेंज से मारी गई है। क्या आरोपी को कोई हथियार दिया गया था। आप कह रहे हैं कि उसने पिस्टल छीनी थी?

     कोई हथियार नहीं दिया गया था। उसने पिस्टल छीनी नहीं थी, ये हाथापाई के दौरान गिर गई थी।

     हम चाहते हैं कि आरोपी को जेल से निकालने से लेकर उसे अस्पताल में मृतक घोषित किए जाने तक के CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं।

    ठाणे पुलिस ने इसी वैन में आरोपी का एनकाउंटर किया था। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार सुबह इसकी जांच की।
    ठाणे पुलिस ने इसी वैन में आरोपी का एनकाउंटर किया था। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार सुबह इसकी जांच की।

     बच्चियों से रेप का आरोपी अक्षय शिंदे स्कूल में स्वीपर का काम करता था। वह 1 अगस्त को ही कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हुआ था। 12 और 13 अगस्त को उसने स्कूल के गर्ल्स वॉशरूम में किंडरगार्टन में पढ़ने वाली 3 और 4 साल की दो बच्चियों का यौन शोषण किया।

    घटना के बाद दोनों बच्चियां स्कूल जाने से डर रही थीं। एक बच्ची के माता-पिता को शक हुआ तो उन्होंने बेटी से पूछताछ की। इसके बाद बच्ची ने सारी बात बताई। फिर उस बच्ची के माता-पिता ने दूसरी बच्ची के पेरेंट से बात की। इसके बाद दोनों बच्चियों का मेडिकल टेस्ट हुआ, जिसमें यौन शोषण का खुलासा हुआ।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया था कि बच्ची आरोपी शिंदे को दादा (बड़े भाई के लिए मराठी शब्द) कहकर बुलाती थी। बच्ची के मुताबिक, ‘दादा’ ने उसके कपड़े खोले और गलत तरीके से छुआ। स्कूल में जहां घटना हुई थी, वहां महिला कर्मचारी नहीं थी।

    दोनों बच्चियों का परिवार जब केस दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचा, तो पुलिस ने भी FIR दर्ज करने में टालमटोल की। पीड़ित परिवारों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं से मदद मांगी। दो दिन बाद 16 अगस्त की देर रात पुलिस ने शिकायत दर्ज की। पुलिस ने 17 अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार किया था।

    20 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने स्कूल का मेन गेट खुलवाया और अंदर घुसकर तोड़फोड़ की।
    20 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने स्कूल का मेन गेट खुलवाया और अंदर घुसकर तोड़फोड़ की।

    घटना को लेकर भीड़ ने 20 अगस्त को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक बदलापुर स्टेशन पर प्रदर्शन किया था। 10 घंटे से ज्यादा लोकल ट्रेनों की आवाजाही रुकी रही। शाम को पुलिस ने लाठीचार्ज कर रेलवे ट्रैक खाली कराया। तब पुलिस पर भीड़ ने पत्थरबाजी भी की थी।

    कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए बदलापुर स्टेशन पहुंचे, लेकिन उन्हें लौटना पड़ा था। इसके बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIT गठित करने का ऐलान किया। इसके अलावा सरकार ने केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की बात कही थी।

    राज्य सरकार ने केस दर्ज करने में देरी के आरोप में बदलापुर थाने के महिला पुलिस निरीक्षक समेत 3 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही प्रिंसिपल समेत कुछ स्कूल स्टाफ को भी सस्पेंड किया था।

    बदलापुर के स्कूल में बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपी अक्षय पर गोली चलाने वाले इंस्पेक्टर संजय शिंदे ठाणे क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल के हेड रह चुके हैं। वे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा की टीम में भी थे। इसी टीम ने 2017 में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के भाई इकबाल कासकर को गिरफ्तार किया था।

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 मार्च को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को आजीवन जेल की सजा सुनाई थी। उन्हें 2006 में गैंगस्टर छोटा राजन के करीबी के फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी माना गया था। प्रदीप शर्मा की टीम के एनकाउंटर की कहानी पर डॉक्युमेंट्री सीरीज भी बन चुकी है।

    संजय शिंदे के खिलाफ 2012 में इन्क्वायरी भी हुई थी। 2012 में दो हत्या मामलों का आरोपी विजय पलांडे पुलिस हिरासत से भाग निकला था। वह जिस SUV से भागा था, उसमें संजय की वर्दी मिली थी। वे साल 2000 में भी किडनैपिंग केस में विवादों में आए थे।

    बदलापुर में नाबालिग लड़की से यौन उत्पीड़न के आरोपी अक्षय शिंदे के एनकाउंटर के बाद बुधवार सुबह मुंबई के बांद्रा कला नगर में कई पोस्टर लगाए गए हैं। इसमें डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस की तीन तस्वीरें लगाई गई है।

    तस्वीरों में फडणवीस बंदूक और असॉल्ट राइफल पकड़े नजर आ रहे हैं। भगवा रंग के इस पोस्टर में ‘बदला पूरा’ लिखा हुआ है। फिलहाल इस मामले में फडणवीस की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पोस्टर किसने लगवाया है इसकी भी जानकारी सामने नहीं आई है।

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