छत्तीसगढ़ में ‘राम-मूर्ति’ पर सियासी बवाल:BJP बोली-श्रीराम जैसी नहीं, कांग्रेस ने कहा-भाजपा के मन में खोट; जानिए विवाद और नई मूर्ति की खासियत

दोनों बयान भाजपा के 2 वरिष्ठ नेताओं के हैं। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल भगवान राम की नई मूर्ति को ग्वालियर में तैयार करवा रहा है। इसका पता चलने के बाद एक फिर राजनीति और भाजपा-कांग्रेस में जुबानी जंग शुरू हो गई है।
कांग्रेस नेता जहां इसे लेकर BJP की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपाई राम के नाम पर कांग्रेसियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं।
दरअसल, कौशल प्रदेश (छत्तीसगढ़) भगवान राम का ननिहाल है। यहां के लोग उन्हें भांचा यानी भांजा मानते हैं। उन्होंने अपने वनवास का सबसे ज्यादा समय भी यहीं बिताया। श्रीराम यहां कोरिया से लेकर कोंटा तक 2226 किमी पैदल चले और 12 चातुर्मास किए।
भगवान राम जिन 9 जिलों से होकर गुजरे, उस पथ की 75 जगहों को चिह्नित किया गया। इनको विकसित करने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 137 करोड़ 45 लाख का ‘राम वन गमन परिपथ’ का प्रोजेक्ट तैयार किया। इसी पथ की शुरुआत में चंदखुरी में प्रदेश की सबसे ऊंची भगवान राम की प्रतिमा स्थापित है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र (2024-25) के 5वें दिन राम वन गमन पथ का मुद्दा गूंजा था। सदन में चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने योजना के तहत स्थापित भगवान राम की मूर्तियों के स्ट्रक्चर और उनकी कीमत पर सवाल उठाया था।
तब सदन में तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस योजना को नए सिरे से रिलांच करने का ऐलान किया था। उन्होंने योजना का सोशल ऑडिट कराने के लिए बनाई जाने वाली समिति का अध्यक्ष भी अजय चंद्राकर को बनाया है।
- राम वन गमन पथ में जिन स्थानों को शामिल किया गया है, उनका उल्लेख आज तक हुए शोध में कहीं नहीं है।
- राम वन गमन योजना के तहत भगवान श्रीराम की जो मूर्तियां बनाई गई हैं, वे विकृत बनाई गई।
- कांग्रेस नेताओं ने अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए राम वन गमन पथ योजना का रोड मैप बनाया है।
- योजना के तहत उन स्थानों का विकास किया गया, जहां कांग्रेस नेताओं और उनसे जुड़े हुए लोगों की संपत्ति है।
- राम वन गमन पथ योजना का निर्माण कार्य जिन एजेंसियों को दिया गया है। वे एजेंसियां कांग्रेस नेताओं के करीबियों से ताल्लुक रखती है।
- योजना का निर्माण कार्य करने में कई एजेंसियों ने मनमानी की, फिर कांग्रेस शासन ने लगातार उन एजेंसियों को भुगतान किया है।
- योजना के तहत जिन कंपनियों ने निर्माण कार्य का ठेका लिया है। उन एजेंसियों ने पेटी कांट्रैक्ट में काम करवाया है। पेटी कांट्रैक्ट में काम करवाने से गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ हुआ है।
- कंपनियों का भुगतान करने से पहले पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं की और कंपनियों को भुगतान कर दिया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है- भूपेश सरकार ने राम वन गमन पथ परियोजना की शुरुआत की। माता कौशल्या के मंदिर का जीर्णोद्धार किया। चंदखुरी में श्रीराम की विशाल प्रतिमा स्थापित की। प्रदेश में रामायण, रामचरित मानस का सार्वजनिक और सरकारी आयोजन किया।
उन्होंने कहा कि, ये सब कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी को चिढ़ा रहे है। 15 साल में भाजपा नेता इन सब कामों को नहीं कर पाए, इसलिए वे बदला ले रहे है और श्रीराम की मूर्ति को तोड़ रहे हैं।
वहीं भाजपा नेताओं का कहना है-कांग्रेस राम के नाम का उपयोग करती है। कांग्रेस के अंदर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के लिए भावना नहीं है। ये वहीं कांग्रेस है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा लगाकर भगवान राम औ राम सेतु को काल्पनिक बताया था।
उन्होंने कहा कि-कांग्रेस सरकार में राम के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ है। जिस मूर्ति को कांग्रेस नेताओं ने लगाया था, वो श्रीराम जैसी बिल्कुल नहीं थी। अब जो मूर्ति लगेगी, उसमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम की झलक श्रद्धालुओं को दिखेगी।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों के अनुसार, चंदखुरी में जो मूर्ति लगी है, वो राम वन गमन पथ में लगी पहली भगवान राम की पहली मूर्ति है। इसे बनाने वाले दीपक विश्वकर्मा ने ही शिवरीनारायण और सीतामढ़ी हरिचौका में लगी मूर्तियां बनाई हैं। वैसी ही अब चंदखुरी के लिए बना रहे हैं। दो महीने में मूर्ति बनकर तैयार हो जाएगी। चेहरे का आकार बन गया है, बाकी हाथ-पैर की नक्काशी बाकी है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन (10 फरवरी 2024) राम वन गमन पथ का मुद्दा गूंजा। सदन में चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि योजना के तहत बनाई गईं मूर्तियां राम जैसी नहीं दिखती। जहां-जहां मूर्तियां लगी हैं उसकी कीमत भी अलग-अलग दर्शाई गई है। बीजेपी योजना को नए सिरे से रिलॉन्च करने की तैयारी कर रही है। सदन से बृजमोहन अग्रवाल ने इस बात का ऐलान किया है।



