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    जम्मू-कश्मीर की 40 सीटों पर कल वोटिंग:आखिरी फेज में 415 कैंडिडेट्स; आतंकी अफजल गुरू और इंजीनियर राशिद के भाई चुनावी मैदान में

    Akash TimesBy Akash Times30/09/2024No Comments9 Mins Read
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    जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के आखिरी और तीसरे चरण में कल मंगलवार (1 अक्टूबर) को 7 जिलों की 40 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। इसमें 39.18 लाख वोटर्स शामिल होंगे।

    तीसरे फेज की 40 सीटों में से 24 जम्मू डिवीजन और 16 कश्मीर घाटी की हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, आखिरी फेज 415 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। इनमें 387 पुरुष और 28 महिला उम्मीदवार हैं।

    थर्ड फेज में 169 कैंडिडेट्स करोड़पति और 67 उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं। जम्मू के नगरोटा से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह राणा की सबसे ज्यादा 126 करोड़ संपत्ति है।

    इस फेज में संसद हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु के बड़े भाई एजाज अहमद गुरु भी चुनावी मैदान में है। एजाज गुरु सोपोर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी हैं।

    नॉर्थ कश्मीर की लंगेट सीट से इंजीनियर राशिद के भाई खुर्शीद अहमद शेख चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग बारामूला से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

    18 सितंबर को पहले फेज की 24 विधानसभा सीटों वोटिंग हुई। इस दौरान 61.38% वोटिंग हुई। वहीं 25 सितंबर को 6 जिलों की 26 विधानसभा सीटों 57.31% मतदान हुआ।

    तीसरे फेज में जम्मू जिले की सबसे ज्यादा 11 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। वहीं बारामूला की 7, कुपवाड़ा और कठुआ की 6-6, उधमपुर की 4, बांदीपोरा और सांबा की 3-3 सीटों पर वोटिंग होगी। बारामूला सीट पर सबसे ज्यादा 25 कैंडिडेट्स चुनावी मैदान में हैं। वहीं जम्मू की अखनूर में 3 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है।

    आखिरी फेज में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) 33 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन में चुनाव लड़ रहे नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 18 जबकि कांग्रेस 24 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा के 29 कैंडिडेट्स हैं। वहीं 155 निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं।

     एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के फेज 3 के 415 उम्मीदवारों के हलफनामे के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे फेज के 415 कैंडिडेट की एवरेज संपत्ति 2.76 करोड़ रुपए हैं। 415 में से 41% यानी 169 कैंडिडेट्स करोड़पति हैं। इनके पास एक करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति है।

    भाजपा के 29 में से 22 कैंडिडेट्स करोड़पति हैं। पार्टी के प्रत्याशियों की एवरेज संपत्ति 10.57 करोड़ रुपए है। वहीं कांग्रेस के 24 में से 19 प्रत्याशी की संपत्ति एक करोड़ या उससे ज्यादा है। भाजपा के जम्मू के नगरोटा सीट से प्रत्याशी देवेंद्र सिंह राणा की सबसे ज्यादा 126 करोड़ और सोपोर से निर्दलीय प्रत्याशी मंजूर अहमद कालू की सबसे कम 6,000 रुपए संपत्ति है। वहीं 6 कैंडिडेट्स ने अपनी संपत्ति शून्य घोषित की है।

     की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे फेज के 415 में से 16% यानी 67 उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं। वहीं 13% यानी 52 कैंडिडेट्स ऐसे हैं जिन पर हत्या, किडनैपिंग जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। 5 उम्मीदवारों पर हत्या की कोशिश के मामले हैं।

    थर्ड फेज की 40 में से 11 रेड अलर्ट सीटें हैं। रेड अलर्ट सीटें उन्हें कहा जाता है जहां 3 या उससे अधिक कैंडिडेट पर क्रिमिनल केस दर्ज हो। 11 रेड अलर्ट सीटों में सोपोर, बारामूला, सोनावारी, सांबा, जम्मू उत्तर, बाहु, जम्मू पूर्व, गुलमर्ग, बिश्नाह (SC), विजयपुर, पट्टन शामिल हैं।

    कुपवाड़ा विधानसभा सीट बारामूला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। नेशनल कांफ्रेंस (JKNC) ने नासिर असलम वानी को चुनावी मैदान में उतारा है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस (JKPC) ने सज्जाद गनी लोन और PDP ने मीर मोहम्मद फयाज उम्मीदवार बनाया है।

    पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2014 में कुपवाड़ा विधानसभा सीट JKPC के उम्मीदवार बशीर अहमद डार ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कुल 24,754 वोट हासिल किए थे। दूसरे नंबर पर PDP के मीर मोहम्मद फैयाज रहे थे जिन्होंने कुल 24,603 वोट हासिल किए थे। 1996, 2002 और 2008 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मीर सैफुल्लाह इस सीट से चुनाव जीते हैं। जबकि 1987 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के ही मुश्ताक अहमद लोन यह सीट जीती थी।

    नॉर्थ कश्मीर की लंगेट से 2008 में अवामी इत्तिहाद पार्टी (AIP) के चेयरमैन शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर राशिद ने अपना पहला विधानसभा चुनाव जीत राजनीतिक सफर शुरू किया था। इंजीनियर राशिद ने लोकसभा चुनाव में जेल से चुनाव लड़ते हुए बारामूला सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को हराया था।

    लंगेट सीट नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रही है। लेकिन 2008 में इंजीनियर राशिद की जीत के बाद से स्थिति काफी बदल गई। 2014 में भी यहां से रशीद ही चुनाव जीते। इस बार सीट पर इंजीनियर राशिद के भाई खुर्शीद अहमद शेख चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) के नेता और कुपवाड़ा के डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल (DDC) के मौजूदा अध्यक्ष इरफान सुल्तान पंडितपुरी से है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार इरशाद गनी भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इनके अलावा जम्मू-कश्मीर वर्कर्स पार्टी के अध्यक्ष मीर जुनैद, अपनी पार्टी के मुनव्वर ख्वाजा और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. कलीम उल्लाह भी मैदान में हैं।

    बारामूला उत्तरी कश्मीर का केंद्र है। इस सीट पर 15 निर्दलीय समेत 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला निर्दलीय कैंडिडेट शोएब नबी लोन और मुजफ्फर हसन बेग के बीच देखने को मिल रहा है। शोएब नबी लोन उत्तरी कश्मीर की राजनीति में प्रमुख चेहरा हैं। 2005 में निर्दलीय लड़ते हुए संग्राम विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। लोन के पिता PDP सरकार में शिक्षा मंत्री रहे थे। उनके सामने वरिष्ट नेता और निर्दलीय उम्मीदवार मुजफ्फर हुसैन बेग की चुनौती है। बेग PDP सरकार में 2005-2008 तक जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री बने। साथ ही 2014 में बारामूला से लोकसभा चुनाव भी जीता था। आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद PDP चीफ महबूबा मुफ्ती के साथ मतभेद हुए और पार्टी छोड़ दी। इस बार निर्दलीय मैदान में हैं।

    नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जावेद हसन बेग को टिकट दिया है। 2014 में जावेद हसन बेग ने PDP के टिकट से बारामूला विधानसभा सीट 14,418 वोटों से जीती थी। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुलाम हसन राही को 7017 वोटों के अंतर से हराया था। मार्च 2024 में बेग को नेशनल कॉन्फ्रेंस ज्वाइन की और पार्टी ने उन्हें टिकट दिया। इनके अलावा पीडीपी के मुहम्मद रफीक राथर, कांग्रेस के मीर इकबाल अहमद, तथा तौसीफ रैना, निघत मीर और मीर मुसैब जैसे निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं।

    किसी समय सेब के बागों के लिए मशहूर सोपोर 1990 के दशक की शुरुआत में बढ़ते आतंकवाद को लेकर बदनामी में रहा। अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी इस सीट से तीन बार चुने गए। सोपोर सीट अलगाववादी नेताओं का गढ़ मानी जाती रही है। आतंकवादी गतिविधियों के कारण सीट पर मतदान भी कम रहा है। 2008 के विधानसभा चुनावों में केवल 19 ही वोटिंग हुई। हालांकि 2014 में यह आकड़ा बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया।

    सोपोर सीट एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार वजह है कि यहां से संसद हमले का दोषी अफजल गुरु के भाई एजाज अहमद गुरु सोपोर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। एजाज गुरु पशुपालन विभाग में काम चुके हैं और 2014 में VRS ली थी। वर्तमान में एक ठेकेदार के रूप में काम कर रहे हैं। बता दें कि दिसंबर 2001 में संसद पर हमले की साजिश रचने के जुर्म में अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी।

    सोपोर में कुल 20 कैंडिडेट्स चुनावी मैदान में हैं। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के इरशाद रसूल कर, कांग्रेस के पूर्व विधायक अब्दुल राशिद डार, PDP के इरफान अली लोन प्रमुख चेहरे हैं। कश्मीरी पंडित आरती नेहरू समेत तीन महिला उम्मीदवार भी मैदान में हैं। सोपोर सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच दोस्ताना मुकाबला होगा। 2014 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अब्दुल रशीद डार ने 2,755 वोटों के अंतर से सोपोर सीट जीती थी। 2002 में उन्होंने NC के अब्दुल अहद वकील और पीडीपी के गुलाम मुहम्मद मीर को हराया था।

    • 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाया गया। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहा है।
    • आखिरी बार 2014 में 87 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ था, जिसमें 4 सीटें लद्दाख की थीं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 7 विधानसभा सीटें बढ़ीं। इसलिए इस बार 90 सीटों पर चुनाव हो रहा है।
    • जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीटों में से 74 जनरल, 7 एससी और 9 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।
    • आर्टिकल 370 हटने के पहले विशेष राज्य होने के कारण जम्मू-कश्मीर सरकार का कार्यकाल 6 साल का होता था, लेकिन अब यह 5 साल का ही होगा।

    जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीटों पर 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को तीन फेज में वोटिंग होनी है। बहुमत का आंकड़ा 46 है। नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2014 चुनाव में PDP ने सबसे ज्यादा 28 और भाजपा ने 25 सीटें जीती थीं। दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी।

     मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 87 लाख 9 हजार वोटर्स हैं। विधानसभा चुनाव के लिए 11838 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। हर बूथ पर औसतन 735 वोटर्स वोट डालेंगे। महिलाओं और दिव्यांग के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं 360 मॉडल पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।

    जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब BJP और PDP ने गठबंधन सरकार बनाई थी। 2018 में गठबंधन टूटने के बाद सरकार गिर गई थी। इसके बाद राज्य में 6 महीने तक राज्यपाल शासन (उस समय जम्मू-कश्मीर संविधान के अनुसार) रहा। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।

    राष्ट्रपति शासन के बीच ही 2019 के लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें BJP भारी बहुमत के साथ केंद्र में लौटी। इसके बाद 5 अगस्त 2019 को BJP सरकार ने आर्टिकल -370 खत्म करके राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। इस तरह जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।

     ​​​​​​​जम्मू-कश्मीर में 2014 के विधानसभा चुनाव में 87 सीटें थीं। जिनमें से 4 लद्दाख की थीं। लद्दाख के अलग होने पर 83 सीटें बचीं थीं। बाद में परिसीमन के बाद 7 नई सीटें जोड़ी गईं। उनमें 6 जम्मू और 1 कश्मीर में है। अब कुल 90 सीटों पर चुनाव होगा। इनमें 43 जम्मू, 47 कश्मीर संभाग में हैं। 7 सीटें SC (अनुसूचित जाति) और 9 सीटें ST (अनुसूचित जनजाति) के लिए रिजर्व हैं।

    केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की पांच सीटें हैं। 2024 चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा को 2-2 सीटों पर जीत मिली थी जबकि एक सीट से निर्दलीय इंजीनियर राशिद को जीत मिली थी।

    ‘10 साल बाद चुनाव हो रहे हैं। कश्मीर का यूथ सब समझने लगा है। अब इमोशनल पॉलिटिक्स नहीं चलेगी। इंजीनियर राशिद ने इमोशनल कार्ड खेला है, लेकिन हम ऐसे लोग चाहते हैं जो हमारी आवाज उठाएं। हमारे भले के लिए काम करें।‘ जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में रहने वाले गौहर खान की चुनाव से उम्मीदें बिल्कुल साफ हैं। वे डेवलपमेंट चाहते हैं।

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